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Showing posts from December, 2018

भारतीय संविधान

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भारतीय संविधान  भारतीय संविधान का तात्पर्य अर्थात अर्थ कह सकते हैं, प्रबंध करना,व्यवस्था या आयोजन करना होता है।। संविधान एक मौलिक दस्तावेज है, जो राज्य के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की स्थिति एवं शक्तियों को स्पष्ट करता है।  यह केवल राज्य के अंगों का सृजन ही नहीं बल्कि प्राधिकार को सीमित करते हुए उन्हें निरंकुशता या तानाशाही से रोकता है।। संविधान ऐसी प्रणाली होती है जो देश में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए की जाती हैं तथा विभिन्न विभागों कार्य सौंपा जाता है जिसके माध्यम से देश में शांति स्थापित की जाती हैं और किसी प्रकार का कोई विद्रोह ना हो इसलिए एक व्यवस्था स्थापित की जाती है जिसे हम संवैधानिक व्यवस्था कह सकते हैं हमारे शब्दों में।। संविधान के उद्देश्य 👇👇 सरकार के सभी अंगों को बनाना।  जैसे विधान पालिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका आदि। सरकार के सभी अंगों की शक्तियां जैसे कर्तव्य, दायित्व आदि को निर्धारित करना। नागरिकों के मौलिक अधिकारों व कर्तव्य और नीति निदेशक तत्व का उल्लेख करना।।   मूल या मौलिक अधिकार कानून ...

दहेज प्रथा एक अभिशाप

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भारतीय समाज में अनेक प्रथाएं प्रचलित हैं, जिसमें एक दहेज प्रथा भी हैं।  जिसमें  बेटी को विवाह के समय उपहार स्वरूप कुछ धन या गहने दिए जाते हैं, जो उनकी मदद के लिए होते थे।।  लेकिन आज दहेज प्रथा ने एक बड़ा विकराल रूप धारण कर लिया है, दहेज के अभाव में योग्य कन्याओं को भी अयोग्य वर को सौंप दिया जाता है, दहेज प्रथा के कारण आज कितने ही परिवार विवश और दुखी हैं। गरीब परिवार के माता पिता अपनी बेटी का विवाह नहीं कर पाते, क्योंकि वह दहेज रूपी लोभी व्यक्ति  दहेज की मांग करते हैं लेकिन वह गरीब परिवार की बेटी का पिता दहेज देने में सक्षम नहीं हो पाता और अपने आप को घृणित महसूस करते हैं।। हमारा सामाजिक परिवेश कुछ इस प्रकार का बन चुका है कि यहां पर व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसके आर्थिक हालातों पर निर्भर करती हैं, जिसके पास जितना अधिक धन होता है, उसको ही समाज में इज्जत और महत्व दिया जाता है।।  ऐसे परिदृश्य में लोगों का लालची होना और दहेज की आशा रखना तो स्वाभाविक परिणाम है यह मनुष्य के लालच और उसकी आर्थिक आकांक्षाओं जुड़ी हैं इसे  विडंबना कहा जायेगा।। ...