भारतीय संविधान



भारतीय संविधान 
भारतीय संविधान का तात्पर्य अर्थात अर्थ कह सकते हैं, प्रबंध करना,व्यवस्था या आयोजन करना होता है।।
संविधान एक मौलिक दस्तावेज है, जो राज्य के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की स्थिति एवं शक्तियों को स्पष्ट करता है।
 यह केवल राज्य के अंगों का सृजन ही नहीं बल्कि प्राधिकार को सीमित करते हुए उन्हें निरंकुशता या तानाशाही से रोकता है।।

संविधान ऐसी प्रणाली होती है जो देश में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए की जाती हैं तथा विभिन्न विभागों कार्य सौंपा जाता है जिसके माध्यम से देश में शांति स्थापित की जाती हैं और किसी प्रकार का कोई विद्रोह ना हो इसलिए एक व्यवस्था स्थापित की जाती है जिसे हम संवैधानिक व्यवस्था कह सकते हैं हमारे शब्दों में।।






संविधान के उद्देश्य
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सरकार के सभी अंगों को बनाना।
 जैसे विधान पालिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका आदि।
सरकार के सभी अंगों की शक्तियां जैसे कर्तव्य, दायित्व आदि को निर्धारित करना।
नागरिकों के मौलिक अधिकारों व कर्तव्य और नीति निदेशक तत्व का उल्लेख करना।।


 मूल या मौलिक अधिकार

कानून के प्रति सभी को समान या समता का अधिकार होता है।
जाति धर्म एवं मूल वंश आदि के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता है।
स्वतंत्रता का अधिकार भी इसमें विद्यमान होता है, जिसमें स्वतंत्रता पूर्वक अपनी बात रखना होता है।
इसमें मोटे तौर पर कह सकते हैं इसमें बहुत सारे अधिकार और भी आते हैं जिसे धार्मिकता का, शिक्षा का, संस्कृतिक का अपने विचार अभिव्यक्ति का।।




 मौलिक कर्तव्य

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 संविधान का पालन करना उसके आदर्शों, संस्थाओ राष्ट्र ध्वज का सम्मान करना।देश की रक्षा सभी लोगों में समरसता और सम्मान ताकि भावना का निर्माण करना हमारी सामाजिक संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को समझना। देशकी रक्षा करना, देश में शांति व्यवस्था को कायम बनाए रखना।

इस प्रकार मोटे तौर पर कह सकते हैं कि  बहुत सारी ऐसी नियम में मर्यादा होती है, जो देश के सभी लोगों को उन मौलिक कर्तव्यों का पालन करना होता है।।

इस प्रकार इस में अनुच्छेद एवं धाराएं भी बनाई जाती हैं, जो देश में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए प्रमाणित होती हैं और उनके उल्लंघन करने पर उनको दंडित किया जाता है, और उन्हें में सजा का पात्र माना जाता है।
 जैसे धारा 370 , 342, धारा 361
 अनुच्छेद 252 ,361 यह सारे अनुच्छेद और धाराएं देश में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए बनाई गई हैं।
या कह सकते हैं देश को सुव्यवस्थित ढंग से चलाना।।

विश्व संविधान बनाम परमात्मा का संविधान
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जिस प्रकार देश में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए एक संविधान का निर्माण किया जाता है उसी प्रकार एक परमात्मा की भक्ति करने के लिए भी एक भगवान के द्वारा संविधान बनाया गया है।।
 उस संविधान के तहत चलने पर ही हमें सर्व सुख एवं मुक्ति प्राप्त होती हैं।।




जिस प्रकार हम संविधान का उल्लंघन करने पर सजा के पात्र घोषित किए जाते हैं, इसी प्रकार परमात्मा के संविधान में भी उनके संविधान का उल्लंघन करने पर सजा का पात्र माना जाता है, हम यहां के संविधान से तो किसी भी प्रकार बड़ी हो जाते हैं अर्थात निर्दोष साबित होते हैं।
 लेकिन उस परमात्मा के संविधान से हमें कोई नहीं बचा सकता, वहां तो सटीक एवं बहुत ही कठोर नियम है।।


जिस प्रकार देश की शासन व्यवस्था की बागडोर कह सकते हैं प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के हाथ में होती है ।

इसी प्रकार परमात्मा के संविधान में भी एक संप्रभु शक्ति होती हैं, अर्थात  पूर्ण परमात्मा होते हैं।। जिनसे यह सर्व ब्रह्मांड सभी लोको की शासन व्यवस्था चलती हैं।
 उसमें भी पद व्यवस्था होती हैं सबको अपने अपने स्तर के पद एवं शक्तियां और अधिकार विद्यमान होते हैं।।

उसके अनुसार ही सभी कार्य करते हैं और अपने नियमों में रहते हैं।।
 लेकिन हम आज सर्व मानव समाज उन परमात्मा के संविधान से तो परिचित नहीं हैं इसी कारण से हम उस प्रभु को पहचान नहीं पा रहे हैं।।
 कि परमात्मा कौन है? संप्रभु कौन है? सर्व उत्पादक या शासन की बागडोर कौन संभाल रहा है???




कबीर -
पर द्वार स्त्री का खोले ।
   70 जन्म अंधा हो डोले।।

इस वाणी में कबीर साहिब ने स्पष्ट किया है कि अपनी पत्नी के अलावा किसी अन्य स्त्री के साथ संभोग भोग विलास  करते हैं, तो हमें उस परमात्मा के संविधान के तहत हमें 70 जन्म तक हमें अंधे होकर जन्म लेना पड़ता है।


गरीब
 तुमने उस दरगाह का महल ना देखा।
 धर्म राय के तिल तिल का लेखा।।

इसमें स्पष्ट किया गया है कि तुमने उस परमात्मा अर्थात उस सत्पुरुष का दरबार नहीं देखा जहां पर हर पैसे का हिसाब दिया जाता है अर्थात हर बुराई करने पर हमें दंडित किया जाता है।।
उस परमात्मा के संविधान में हमारे सभी कर्मों का लेखा-जोखा होता है।।


यदि आप उस परमात्मा के संविधान का पालन कर अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं ।
और सर्व बुराइयों से दूर होना चाहते हैं , तो उस परमपिता परमात्मा के संविधान का हमें पालन करना होगा।

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Comments

  1. शास्त्र परमात्मा का संविधान है, जो लोग शास्त्र विरूद्ध साधना करते है वे परमात्मा के संविधान का उल्लंघन करते हैं... शास्त्र अनुकूल साधना क्या है? शास्त्रो का गुढ रहस्य जानने के लिए अवश्य मंगवाये घर बैठे बिल्कुल निशुल्क पुस्तक #ज्ञान_गंगा अभी ओर्डर करने के लिए अपना नाम पूरा पता और मोबाइल नम्बर कमेंट करे...

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  2. बिल्कुल सही संत जी के अनुसार चलेंगे तो सब सुखी हो जाएंगे

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